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भारतीय न्यायपालिका में बढ़ता जातिवाद : सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा न्यायपालिका में डाइवर्सिटी ख़त्म, ब्राह्मणों का वर्चस्व, उप-राष्ट्रपति भी की सांसद की तारीफ़

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निःसंदेह जाति प्रथा एक सामाजिक कुरीति है। ये विडंबना ही है कि देश को आजाद हुए सात दशक से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी हम जाति प्रथा के चंगुल से मुक्त नहीं हो पाएं हैं। मौलिक अधिकारों में जो आरक्षण या प्रतिनिधित्व का अधिकार दिया गया है, वह देश की सभी व्यवस्थाओं में लागू होता है, जिससे न्यायपालिका भी अछुती नहीं है।

लेकीन पिछले 70 सालों में अनु.जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाओं का प्रतिनिधीत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं रहा, या यूं कहे तो उनको उनके मौलिक अधिकार से षडयंत्रपूर्वक वंचित रखा गया।

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी सेवायरल हो रहा है जिसमे सांसद जॉन ब्रिटास ने जातिवादी न्यायपालिका को संसद में धो डाला। उन्होंने कड़ाई से मामला उठाया। उन्होंने कहा न्यायपालिका में जातिंयों का प्रतिनिधित्व नहीं है इसे लेकर हंगामा होते देखा जा सकता है जो आप वीडियो में देख सकते है।

हालाँकि जॉन ब्रिटास के भाषण की उप-राष्ट्रपति वेंकय्या नायडू ने भी तारीफ़ की है। उप-राष्ट्रपति ने कहा जॉन ब्रिटास ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा ख़ूबसूरती से उठाया लेकिन हमें निराशा है कि राष्ट्रीय स्तर के किसी एक भी मीडिया ने इस कवर नहीं किया है।

उन्होंने ने अपने अभिभाषण के दौरान नागालैंड फायरिंग में मारे गए आदिवासियों के प्रति दुःख व्यक्ति किया और कड़े शब्दों में न्यायपालिका में जातिवाद का मदद उठाते हुए कहा जज ही जज की नियुक्त करेगा यह कहाँ से निष्पक्ष है और पारदर्शी है ? उन्होने कहा 12 सांसद जिन्हे हाउस से निलंबित किया गया है उनके प्रति हमारी संवेदना है जो गैर लोकत्रांतिक है।

उन्होंने कहा ऐसा इस लिए है क्यूंकि न्यायपालिका में जातिवाद है और भारतीय न्याय व्यवस्था में जातीय विभिन्नता नहीं है। एक जाति (ब्राह्मण) का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा आज न्याय व्यवस्था की सवंत्रता खतरें में है। जिसको लेकर स्पस्टता से बात होनी चाहिये। लेकिन एक गगम्भीर मुद्दा है की जज की नियुक्त करने का मुद्दा अभी साफ नहीं है।

जजों की जज ही नियुक्त करेगा ऐसा ही चला आ रहा है। कानून मत्रालय ने अभी तक कोई फॉर्मेट नहीं तैयार किया है जिससे जजों को नियुक्त बगैर पक्षपात और संवैधानिक आरक्षण प्रक्रिया को अपनाते हुए पूरी हो सके। उन्होंने कहा राष्ट्रीय नयायधीश नियुक्त आयोग की आज मांग है जिससे न्यायपालिका में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व योग्यता कर पारदर्शिता के साथ हो सके।

इससे आम जनता को भी जानने को मिलेगा कौन जज नियुक्त करता है और उनके प्रतिद्वंदी कौन है ऐसा एक सिस्टम होना चाहिए , उन्होंने कहा भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ जजों को नियुक्त को अंधकार में रखा जाता है जिसके बारे में कुछ भी मालूम नहीं है। यही कारण है कि भारत की न्यायपालिका को कथित रूप से बर्बाद किया जा रहा है।

ये हमारा मुद्दा है कोई पाकिस्तान का नहीं है जिसे हमे बनाना होगा, हमे देश की न्याय व्यवस्था को स्वतन्त्र बनाना होगा। उन्होंने के न्यायाधीशो की प्रोफाइल को पढ़ते हुए कहा भरी भतीजावाद है बिना नाम लिए हुए कहा उनके दादा, पापा, चाचा, और बेटे एक लम्बी लाइन है जो न्याय व्यवस्था के शीर्ष पद पर बैठे है उन्होंने कहा ऐसा कोई सिस्टम नहीं है जजों को नियक्ति जिससे पारदर्शी हो, जहाँ उनकी एक निश्चित योग्यता हो, उम्र आदि सभी का कोई आधार हो

आज जजों नियुक्त पर उम्र और योग्यता से किसी को आयोग्य कर दिया जाता है तो किसी को योग्य कुछ भी साफ नहीं है। उन्होंने कहा पूरी तरह न्यायपालिका में ब्राह्मणवाद बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा इस लिए राष्ट्रीय न्यायाधीश सिलेक्शन कमीशन का गठन होना चाहिए।

उन्होंने कहा पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगो के प्रतिनिधित्व होना जरूरी है इनका प्रतिनिधित्व होना चाहिये , आज की तारिख में 47 जज है सुप्रीम कोर्ट में जिनमे 14 ब्रह्मण है।
1950 से 1970 के बीच सुप्रीम कोर्ट के 14 जजों में से 11 ब्राह्मण थे।
1971 से 1989 के बीच कई लोगो ने नारे लगा कर हंगामा किया तब उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में डाइवर्सिटी नहीं है। और उन्हें आगे कथित तौर पर बोलने नहीं दिया गया जिसका पूरा वीडियो आप यहाँ देख सकते है-

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