एम्स दिल्ली में 144 कोरोना पीड़ितों पर रिसर्च:बुखार को कोरोना का मुख्य लक्षण मानना नाकाफी

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सिर्फ बुखार को कोविड-19 का मुख्य लक्षण मानेंगे तो कोरोना के कई मामले छूट सकते हैं। यह दावा भारतीय शोधकर्ताओं ने एम्स दिल्ली में 144 कोरोना पीड़ितों पर रिसर्च के बाद किया है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित शोध के मुताबिक, यह अध्ययन 20 मार्च से 15 अप्रैल के बीच किया गया है। इसमें 93 फीसदी पुरुष शामिल थे।

5 बातें : क्यों बुखार के अलावा दूसरे लक्षणों पर भी ध्यान देने की जरूरी
#1) 17 फीसदी मरीजों में ही बुखार का लक्षण नजर आया

शोधकर्ताओं के मुताबिक, भर्ती करते समय मात्र 11.1 फीसदी मरीजों को ही बुखार था। रिसर्च के दौरान मात्र 17 फीसदी कोरोना के मरीजों में बुखार का लक्षण दिखा, यह आंकड़ा दुनियाभर के ऐसे मामलों के मुकाबले काफी कम था। जैसे चीन के अस्पताल में भर्ती होने के समय 40 फीसदी कोरोना पीड़ितों में बुखार का लक्षण दिखा। 88 फीसदी मरीजों में बुखार का लक्षण हॉस्पिटल में भर्ती के बाद सामने आया।

#2) भर्ती के समय 44 फीसदी मरीज एसिम्प्टोमैटिक

रिसर्च रिपोर्ट कहती है कि 44 फीसदी मरीज हॉस्पिटल में भर्ती किए जाते समय एसिम्प्टोमैटिक थे। यानी उनमें कोरोना के लक्षण नहीं नजर आ रहे थे। ऐसे मामले कम्युनिटी ट्रांसमिशन की वजह बन सकते हैं। यह सबसे गंभीर पहलू है।

#3) युवाओं में कोरोना के ज्यादातर मामले एसिम्प्टोमैटिक

रिसर्च के मुताबिक, युवाओं में कोरोना के जो मामले हैं उनमें से ज्यादातर ऐसे हैं जिनमें लक्षण दिखाई नहीं देते। लम्बे समय इनकी रिपोर्ट निगेटिव आती है। इस उम्र वर्ग में बहुत कम ही ऐसे मामले सामने आते हैं जिन्हें आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ज्यादातर मरीज भीड़भाड़ वाली जगहों से सामने आ रहे हैं। स्क्रीनिंग करने पर पता चलता है ये हॉटस्पॉट के दायरे में रहे हैं।

#4) 2.8 फीसदी मरीजों की हालत नाजुक हुई

144 मरीजों में से 2.8 फीसदी ही कोविड-19 की गंभीर स्थिति से गुजर रहे थे, वहीं 97.2 फीसदी में माइल्ड लक्षण थे। शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च के दौरान यह साबित हुआ कि बीमारी की गंभीरता, उम्र, जेंडर और धूम्रपान करने के बीच कोई सम्बंध नहीं है। कोरोना के मरीजों में मृत्यु दर 1.4 फीसदी मिली।

#5) मात्र एक फीसदी मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी

शोध के दौरान, ज्यादातर मरीजों को विटामिन-सी, पैरासिटामॉल और एंटीहिस्टामाइन दी गई। 29 मरीजों को एंटीबायोटिक्स एजिथ्रोमायसिन दी गई। वहीं, 27 मरीजों को एंटी-मलेरिया ड्रग हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दी गई। 11 मरीजों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमायसिन दोनों दी गईं। मात्र एक मरीज को वेंटिलेटर और 5 पीड़ितों को ऑक्सीजन दी गई।

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