चीन से पंगा लेकर भारी कीमत चुकाएगा भारत

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भारत से चल रहे सीमा विवाद के बीच चीन की सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख छापा है. इसमें कहा गया है कि भारत ने चीन के साथ संघर्ष जारी रखा तो उसे इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी. इसके साथ ही, कोरोना वायरस और अर्थव्यवस्था को लेकर भी मोदी सरकार को निशाने पर लिया है.
भारत के लिए एलएसी पर ऊंचाई पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती करना काफी खर्चीला होगा. हर दिन हथियारों और सामान की आपूर्ति से भारत की आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ेगा. सर्दी आने पर सेना की तैनाती का खर्च और भी ज्यादा बढ़ जाएगा. सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने दावा किया है कि सेना कड़ी सर्दी के लिए भी तैयार है. सैन्य आपूर्ति की भारी-भरकम लागत को देखते हुए इस तरह का आक्रामक रुख दिखाना बेकार है.

चीन के साथ संघर्ष ना केवल भारत के विदेशी सहयोग को नुकसान पहुंचाएगा बल्कि औद्योगिक आपूर्ति चेन को भी प्रभावित करेगा. इससे भारतीय बाजार में भरोसा कमजोर होगा और निवेश-व्यापार दूर होता चला जाएगा. भारत को युद्ध की मंडराती छाया के आर्थिक असर का आकलन करना होगा क्योंकि सर्दी में एलएसी पर सेना की तैनाती का खर्च उसकी पस्त अर्थव्यवस्था वहन नहीं कर पाएगी.

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त बहुत ज्यादा दबाव में हैं क्योंकि इस वित्तीय वर्ष में जीडीपी में रिकॉर्ड 10 फीसदी की गिरावट आने की आशंका है. भारत और दुनिया भर के तमाम अर्थशास्त्रियों ने ये अनुमान लगाया है. लाखों भारतीय नौकरी गंवाने और काम ना मिलने की वजह से गरीबी के अंधेरे में डूबने वाले हैं.

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