JEE MAIN: आज परीक्षा का दूसरा दिन, पोर्टल की मदद से सेंटर्स पहुंचे परीक्षार्थी

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कोरोना वायरस महामारी के बीच ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JEE MAIN 2020) परीक्षा हो रही है. आज परीक्षा का दूसरा दिन है. परीक्षा का आयोजन 1 सितंबर से 6 सितंबर तक किया जाएगा. एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, JEE परीक्षा के पहले दिन में 65% से 70%  परीक्षार्थी पहुंचे. पेपर 2 मंगलवार के लिए लगभग 1 लाख उम्मीदवारों के सामने आने की उम्मीद थी.

कोविड प्रकोप के बाद पहली राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन, 1 सितंबर से लगभग 8.58 लाख छात्रों ने इसके लिए आयोजित की जा रही है. कल की परीक्षा को लेकर छात्र परीक्षा केंद्रों पर बरती गई सावधानियों को देखकर खुश थे. इसी के साथ ज्यादातर छात्रों ने कहा, परीक्षा जनवरी सेशन में हुई परीक्षा से आसान थी. वहीं कुछ छात्रों को परिवहन की सुविधा नहीं मिली थी. बता दें, परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित की जा रही है. ऐसे में छात्र परीक्षा देने के लिए परीक्षा केंद्र पहुंच चुके हैं.

पोर्टल से मिली मदद

31 अगस्त की रात 9.30 बजे तक, वेंकट आर को यकीन नहीं था कि वह ऊटी में अपने गृहनगर से कोयंबटूर में अपने जेईई परीक्षा केंद्र तक पहुंच पाएंगे. उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि मैं परीक्षा में शामिल नहीं हो पाऊंगा, क्योंकि दोनों स्थानों के बीच परिवहन का कोई साधन नहीं था. जिसके बाद मैं Eduride पोर्टल पर गया, उन्होंने तुरंत एक टैक्सी की व्यवस्था की. मैं समय पर केंद्र पर पहुंच गया. पोर्टल  की वजह से में मैं समय पर केंद्र पहुंच पाया हूं.

इस साल बिहार, गोवा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित देश के विभिन्न राज्यों में छात्र जेईई मुख्य परीक्षा के लिए उपस्थित हुए. परीक्षा कोरोना वायरस महामारी के बीच आयोजित की गई है. ऐसे में  सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए हैं.

परीक्षा आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने परीक्षा में उपस्थित होने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव उपायों का आश्वासन दिया है. एजेंसी ने प्रति केंद्र छात्रों की संख्या को कम करने के लिए परीक्षा केंद्रों की संख्या में वृद्धि की है.

JEE परीक्षा में बैठने वाले उत्तर प्रदेश के एक छात्र ने बताया कि गणित सेक्शन थोड़ा कठिन था. रायबरेली के उत्कर्ष साहू ने कहा, “गणित के कुछ सवालों को छोड़कर पेपर अच्छा चला गया.” उन्होंने यह भी शिकायत की कि अधिकारियों को छात्रों के परिवहन के लिए पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए थी.

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