कृषि कानून से होगा देश के किसानों का कल्याण :- आयुषी जैन

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कृषि से संबंधित कानून को लेकर अखबारों में कई बड़े विज्ञापन देखने को मिला ! विज्ञापन में बताया गया है कि कैसे 3 नए कृषि कानून के जरिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और अनाज मंडियों कि व्यवस्था खत्म नहीं की जा रही हैं , बल्कि इन 3 नए कानूनों के जरिए सरकार ने किसानों को विकल्प देकर आजाद करने का मौका दिया है !
सबसे मजेदार बात यह भी है कि इन कानूनों के कई प्रावधानों को लाने की बात कांग्रेस के नेता भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में करती रहती है, इतना ही नहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल का लोकसभा में दिया गया एक भाषण भी यह दर्शाता है कि पहले वे भी इन कानूनों को लागू करने की वकालत करते थे !
देखा जाए तो ब्रिटिश शासन काल से लेकर आज़ादी के बाद आज तक हमारे देश की 70% आबादी कृषि पर ही निर्भर होने के बावजूद हमारे देश के किसानों की हालत दयनीय हैं ! कर्ज के कारण आत्महत्या करने वाले आंकड़े ख़ुद इस तथ्य की सच्चाई बयां करते हैं ! किसानों की इस दयनीय हालत से देश पर सबसे अधिक समय तक सत्ता में रहने का गौरव प्राप्त करने वाली कांग्रेस अनजान हो एसा भी नहीं है ! यही कारण है कि यह कांग्रेस जब 70 सालों बाद देश अपने लिए वोट मांगती है तो सरकार बनने के 10 दिन भीतर किसानों की कर्जमाफि का वादा करती हैं ! यह अलग ही एक खोज का विषय हैं कि जिन राज्यों में वो कर्जमफी के नाम पर सत्ता में आई थी वहां उसकी सरकार द्वारा कितने किसानों का ऋण माफ किया गया ! मध्य प्रदेश राज्य में 2020 में हुए विधानसभा उपचुनाव के परिणाम देखे तो साफ दिखता है कि किसानों ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया है, अत: विपक्षियों के कोई भी झूठे वादें अब किसानों पर कोई जादू नहीं करेंगे ! आज एक युवा होने के नाते मेरे दिमाग में एक प्रश्न यह भी है कि कोई सरकार किसानों की स्थिति में सुधार लाने के लिए कदम उठा रही है तो वो उसका साथ देने के बजाए विरोध क्यों कर रही है ? यदि देश के विपक्षियों को इन नए कानूनों मे कोई खामियां दिख रही थी तो जब संसद के दोनों सदनों में उसके पास मौका था तो उसने इन कानूनों की कमियां देश के सामने क्यों नहीं रखी ? आँखिर देश की जनता ने उन्हें भी किसी विश्वास के साथ देश की संसद में पहुंचाया था ! वो वहां देश की जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे थे तो वहां क्यों उन्होंने किसानों का पक्ष रखकर उनके हितों के हिसाब से कानून में बदलाव करवाने के प्रयास करने के बजाए संसद की कार्यवाही को बाधित करने का कार्य किया ? जो विपक्ष सड़कों पर संविधान बचाने की लड़ाई लड़ता हैं वो संसद में बिल और रुल बुक की प्रति फाड़ कर या सभापति के माइक को तोड़कर कोन से संविधान की रक्षा करता है ?
यहीं कारण है कि उचित तर्को के अभाव में जो लड़ाई विपक्ष सांसद में हार गई उसे वे भोले – भाले किसानों को गुमराह करके सड़कों पर जितने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन देश के किसान अब सच्चाई को महसूस कर रहे हैं और वे पूरे विश्वास के साथ कृषि कानून के साथ खड़े हैं !

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