क्या मुस्लिम नेता होने की वजह से अनदेखी कर रहे हैं अखिलेश यादव ? जानिए क्या है मामला

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मुलायम के जाने के बाद अखिलेश ने तमाम अच्छे नेताओ की अनदेखी की है, उपेक्षा के शिकार हुए हैं,
कभी कभी जब देखता हू तो पाता हू की चाहे कांग्रेस रही हो या सपा हो या बसपा उनके कुछ बेशकीमती हीरे जैसे मुस्लिम नेता पीछे इसलिए रह जाते हैं,
क्योंकि उनके ऊपर बैठे कुछ लोगों की मानसिकता संघी वाली होती है, वो ऊपर से आपके साथ रहेंगे लेकिन कहीं ना कहीं आपको आगे नही बढ़ने देंगे आपको काटते रहेंगे ,


इसी तरह एक नेता की बात कर रहा हू जो कि कौशांबी की एक हस्ती है जिनकी जमीनी पकड़ बहुत ही बेहतरीन है या ये कहना भी गलत नहीं होगा कि कौशांबी की सीटों को निकलवाने मे मौला बक्श का बहुत बड़ा हाथ होता है, मुलायम से लेके अखिलेश के दौर तक मे कौशांबी जिले मे जितनी भी फतह मिली है सब मे मौला बख्श का हाथ रहा,क्योंकि जहां तक मैं इन्हें जानता हू ये डाई हार्ड सपाई थे,सरकारे आई गई लेकिन खुद को इन्होने नहीं बदला,
इनकी वहा के आवाम मे पकड़ बहुत अच्छी है, और करारी कस्बे के कई बार चेयरमैन रह चुके हैं,
इनके पीछे एक बहुत बड़ी भीड़ की तादाद है जोकि केवल भीड़ नहीं बल्कि वोट है इस बात को मुलायम से लेकर अखिलेश तक समझ गए,

लेकिन मेरे हिसाब से चेयरमैन साहब नही समझ पाए,
जिस हिसाब से उनके पास जनसमूह था और है उस हिसाब से उनको ना कभी मुलायम ने ओहदा दिया ना ही अखिलेश ने, जो इंसान विधायक, सांसद और मंत्री के पद का दावेदार रहा हो आप उसे जिला सचिव या महा सचिव मे ही निपटा रहे हैं, ये दोहरा मापदंड क्यों अखिलेश यादव जी?
मैं इससे इन्कार नहीं करता हू की आपने उन्हें इज्जत नही दी, बिल्कुल आपने इज्जत दी, लेकिन जिस चीज़ के वो हकदार दे वो नही दिया,

 


गर समाजवादी पार्टी मिशन  2022 ऐसे लोगों को वरीयता नही देती है और गर मौला बख्श सपा छोड़ते है तो क्या कौशांबी जीता जा सकता है ?
क्या बिना मौला बख्श के आप बसपा के गढ को भेद पाते?
या अखिलेश यादव जी आप मुस्लिम होने की वजह से अनदेखी कर रहे हैं?

लेखक- सरफराज आलम

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