प्राचीन भारत में सत्ता बचाने के लिए प्रेम व राजनीतिक विवाह, आज लव जिहाद कैसे ?

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मध्यकालीन भारतीय इस्लामी हुकूमतों के साथ सियासी संबंधों में अहम भूमिका रखती हैं। इसे प्रेम युद्ध कहें या लव जिहाद , इन सभी राजकुमारियों की शादियां सुल्तानों, शहजादों के साथ कर दी गईं थी।

कुछ इतिहास कारों का कहना है कि शियासत में शान, शौकत और जगीर पाने के लिए भी प्राचीन भारत के कई राजाओं ने मुस्लिम शासकों से रिश्ते बनाये।

प्रेम विवाह संबंध की नीति का बड़े पैमाने पर आरम्भ अकबर ने किया था, उसके परिणाम बड़े महत्वपूर्ण रहे। अकबर ने जो विवाह कछवाही राजकुमारी से किया था उससे सलीम का जन्म हुआ।

इस निकट संबंध से आमेर के राजपरिवार को महत्व मुगल दरबार और राजस्थान में बढ़ गया। इसका महत्वपूर्ण परिणाम यह हुआ कि मारवाड़ (जोधपुर) के मोटा राजा उदयसिंह ने भी अपने सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करने के अभिप्राय से अपनी पुत्री मानीबाई का विवाह सलीम के साथ कर दिया।

जोधपुर की राजकुमारी होने से उसे जोधाबाई कहने लगे। इसी जोधाबाई को शाहजादा सलीम ने जगत-गुसाई की पदवी देकर सम्मानित किया। इसी जोधाबाई से खुर्रम पैदा हुआ थ। (संदर्भ- डॉ. जीएन शर्मा कृत राजस्थान का इतिहास, पेज-380)

भारत के मध्यकालीन इतिहास में राजपूत वंशों की भांति कछवाह भी राजस्थान के इतिहास मंच पर बारहवीं शताब्दी से महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इसी वंश के शक्तिशाली शासक पंचवनदेव की मृत्यु के बाद मालसी, जिलदेव, रामदेव किल्हण, कुन्तल जणशी, उदयकरण, नरसिंह, उदरण और चन्द्रसेन ने शासन किया।

चंद्रसेन के बाद बेटा पृथ्वीराज और उसकी मृत्यु (1527 ई.) के बाद छोटा बेटा पूर्णमल आमेर का शासक बना। पूर्णमल के साथ ही राजगद्दी के लिए गृह-कलह शुरू हो गया। इस गृह-कलह से गुजरते हुए पूर्णमल से भीमदेव, भीमदेव से रत्न सिंह, आसकरण होते हुए सत्ता भारमल के पास पहुंची।

कछवाह वंश के आमेर(जयपुर) शासक भारमल को अधिकांश इतिहासकारों ने दूरदर्शी बताया है। शेरशाह और अकबर जैसी बड़ी शक्तियों के बीच आमेर में अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए उसने अकबर से संबंध बनाए।

इन्हीं सियासी संबंधों को और करीबी बनाते हुए उसने बाई हर्का का अकबर से विवाह किया। 1562 में हुए इस विवाह से प्रेरित होकर अन्य राजस्थानी शासकों ने भी अपनी राजकुमारियों का विवाह अकबर और उसके राजकुमारों से करना शुरू कर दिया। (संदर्भ- डॉ.गोपीनाथ शर्मा, राजस्थान का इतिहास,पेज-149).

अकबर ने 1585 ई. में जहांगीर को 12 हजार मनसबदार बनाया। 13 फरवरी, 1585 ई. को सलीम का विवाह आमेर के राजा भगवानदास की पुत्री मानबाई से हुआ। मानबाई को जहांगीर ने ‘शाह बेगम’ की उपाधि प्रदान की थी।

कहा जाता है कि मानबाई ने जहांगीर की शराब की आदतों से दुखी होकर आत्महत्या कर ली थी। हालांकि इस बात की सत्यता को कई इतिहासकारों ने स्वीकार नहीं किया है। कालांतर में जहांगीर का विवाह जोधाबाई के साथ हुआ था। (संदर्भ- भारतडिस्कवरी के जहांगीर आलेख से).

सन् 1570 में जैसलमेर की राजकुमारी नाथीबाई और अकबर के विवाह के बाद भाटी-मुगल संबंध समय के साथ-साथ और मजबूत होते चले गए। इसके बाद शहजादा सलीम को हरिराज के पुत्र भीम की पुत्री ब्याही गई, जिसे मल्लिका-ए-जहान का खिताब दिया गया था।

स्वयं जहांगीर ने अपनी जीवनी में लिखा है, रावल भीम एक पद और प्रभावी व्यक्ति था, जब उसकी मृत्यु हुई थी तो उसका दो माह का पुत्र था, जो अधिक जीवित नहीं रहा। जब मैं राजकुमार था तब भीम की कन्या का विवाह मेरे साथ हुआ और मैंने उसे मल्लिका-ए-जहान का खिताब दिया था।

यह घराना सदैव से हमारा वफादार रहा है, इसलिए उनसे संधि की गई। (संदर्भ-इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के जैसलमेर के शासक तथा इनका संक्षिप्त इतिहास से)

हुमायूं और अकबर से पहले विजयनगर साम्राज्य में भी हिंदू राजकुमारी का विवाह एक सुल्तान के साथ विवाह हुआ था। दरअसल, देवराय प्रथम (1406-1422 ई.) को अपने शासन काल में बहमनी सुल्तान फ़िरोजशाह के आक्रमण का सामना करना पड़ा था।

इस युद्ध में फ़िरोज शाह बहमनी से पराजित होने के कारण देवराय प्रथम ने अपनी पुत्री का विवाह फ़िरोज शाह के साथ कर दिया। इस विवाह में दहेज के रूप में देवराय ने बांकापुर का क्षेत्र फ़िरोज शाह को दे दिया।

दक्षिण भारत में देवराय प्रथम की पुत्री का विवाह ऐसा पहला राजनीतिक विवाह नहीं था। इससे पहले ख़ेरला का राजा शान्ति स्थापित करने के लिए फ़िरोजशाह बहमनी के साथ अपनी लड़की की शादी कर चुका था।

कहा जाता है कि वह सुल्तान की सबसे पहली बेगम थी। किन्तु यह विवाह अपने आप में शान्ति स्थापित नहीं कर सका। कृष्ण-गोदावरी के बीच के क्षेत्र को लेकर विजयनगर, बहमनी राज्य और उड़ीसा में फिर संघर्ष छिड़ गया था। (संदर्भ- भारतडिस्कवरी ).

बात अगर वर्तमान भारत की किया जाए तो आज भी बॉलीवुड से लेकर राजनीतिक की पड़ी पार्टी में हिन्दू लड़कियां मुस्लिम लड़को से शादी कर रही है लेकिन कोई चूं तक नहीं करता है लेकिन जैसे है आम व्यक्ति प्रेम में कंही हिन्दू -मुस्लिम में शादी होती है तो कोहराम मच जाता है।

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