नेतृत्व विवाद पर मंथन के बाद CWC ने सोनिया को बनाया अंतरिम अध्यक्ष, दिया ये अधिकार

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नेतृत्व को लेकर उठे विवाद के बीच सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बैठक में हुई चर्चा के बारे में जानकारी मीडिया के साथ शेयर की. उन्होंने बताया कि कांग्रेस कार्यसमिति ने सोनिया गांधी द्वारा संगठन महासचिव को लिखे गए पत्र कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा कांग्रेस अध्यक्षा को लिखे गए पत्र का संज्ञान लिया. सुरजेवाला ने बताया कि संगठनात्मक बदलाव के लिए सभी अधिकार बैठक के दौरान सोनिया गांधी को दिए गए हैं ताकि वे पार्टी को मजबूत करने के लिए अहम कदम उठा सकें.

सुरजेवाल ने कहा कि बैठक के अंत में सोनिया गांधी ने कहा कि हम एक बड़ा परिवार हैं. कई मौकों पर हमारी राय भिन्न-भिन्न हो सकती है. लेकिन आखिरकार हम एक ही हैं. सुरजेवाला ने यह भी बताया कि सोनिया गांधी ने कहा कि मैं किसी के प्रति कोई दुर्भावना नहीं रखती हूं. लेकिन, पार्टी की बात पार्टी फोरम पर ही कहनी चाहिए. पार्टी में टकराव से जुड़े सवाल पर सुरजेवाला ने कहा कि सोनिया गांधी ने सारी विषमताएं अपने अंदर समाहित करते हुए उनका निराकरण कर दिया है अब हम सब एक हैं.

सीडब्ल्यूसी ने इन पत्रों पर गहन विचार किया और चर्चा के बाद निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले.

– पहला, पिछले 6 महीनों में देश पर अनेकों विपत्तियां आई हैं. देश के सामने आई चुनौतियों में (1) कोरोना महामारी है, जो हजारों जिंदगी ले चुकी है; (2) तेजी से गिरती अर्थव्यवस्था व आर्थिक संकट; (3) करोड़ों रोजगारों का नुकसान एवं बढ़ती गरीबी तथा (4) चीन द्वारा भारतीय सीमा में घुसपैठ व कब्जे के दुस्साहस का संकट है.

– दूसरा, इस चुनौतीपूर्ण समय में सरकार की हर मुद्दे पर संपूर्ण विफलता को उजागर करने व विभाजनकारी राजनीति एवं भ्रामक प्रचार-प्रसार का पर्दाफाश करने वाली सबसे ताकतवार आवाज सोनिया गांधी और राहुल गांधी की है. प्रवासी मजदूरों की समस्याओं पर सोनिया गांधी के सटीक सवालों ने बीजेपी सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित की. सोनिया गांधी ने सुनिश्चित किया कि कांग्रेस-शासित राज्यों में कोरोना महामारी को प्रभावशाली तरीके से संभाला जाए और स्वास्थ्य सेवाएं व इलाज समाज के हर वर्ग को उपलब्ध हो सकें. उनके नेतृत्व ने उच्च पदों पर बैठे लोगों को झकझोरा भी और सच्चाई का आईना भी दिखाया.

राहुल गांधी ने भाजपा सरकार के खिलाफ जनता की लड़ाई का दृढ़ता से नेतृत्व किया. कांग्रेस के हर आम कार्यकर्ता की व्यापक राय व इच्छा को प्रतिबिंबित करते हुए, कांग्रेस कार्यसमिति की यह बैठक सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी के हाथों व प्रयासों को हर संभव तरीके से मजबूत करने का संकल्प लेती है. सीडब्लूसी की स्पष्ट राय है कि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर पार्टी एवं इसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति न तो किसी को दी जा सकती है और न ही किसी को दी जाएगी. आज हर कांग्रेसी कार्यकर्ता एवं नेता की जिम्मेदारी है कि वह भारत के लोकतंत्र, बहुलतावाद व विविधता पर मोदी सरकार द्वारा किए जा रहे कुत्सित हमलों का डटकर मुकाबला करे.

– तीसरी व एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे इन दोनों नेताओं की बुलंद आवाज ने, कांग्रेस के अंदर व बाहर, भारतीयों को देशवासियों के साथ खड़े हो भाजपा सरकार से जवाबदेही मांगने व सवाल पूछने के लिए प्रेरित किया है, जबकि सरकार जनता को अपने खोखले व स्वनिर्मित मुद्दों में उलझाकर रखना चाहती है. उनके नेतृत्व में करोड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ता व समर्थक बाहर निकल पड़े, ताकि मौजूदा भाजपा सरकार के अधीन शासन की भारी कमियों की भरपाई हो, जिनकी वजह से गरीब व मध्यम परिवार के लोगों को अपने अधिकारों व आजीविका से वंचित होना पड़ा.

– चौथा, सीडब्लूसी ने इसका भी संज्ञान लिया कि पार्टी के अंदरूनी मामलों पर विचार विमर्श मीडिया के माध्यम से या सार्वजनिक पटल पर नहीं किया जा सकता है. कांग्रेस कार्यसमिति ने सभी कार्यकर्ताओं व नेताओं को राय दी की पार्टी से संबंधित मुद्दे पार्टी के मंच पर ही रखे जाएं, ताकि उपयुक्त अनुशासन भी रहे और संगठन की गरिमा भी.
पांचवां, सीडब्लूसी कांग्रेस अध्यक्षा को अधिकृत करती है कि उपरोक्त चुनौतियों के समाधान हेतु जरूरी संगठनात्मक बदलाव के कदम उठाएं.

उपरोक्त विचार विमर्श एवं निष्कर्ष के प्रकाश में सीडब्लूसी एकमत से सोनिया गांधी से निवेदन करती है कि कोरोना काल में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अगले अधिवेशन के बुलाए जाने तक वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षा के गरिमामय पद पर नेतृत्व करें.

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