भारत में आरक्षण की आड़ में 90 % आरक्षित पदों पर ठाकुर, ब्राह्मण, वैश्य एवं कायश्थ का कब्ज़ा – कौशलेन्द्र प्रताप सिंह का लेख

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भारत में आरक्षण को लेकर लगातार राजनीतिक उठा पटक चलता रहा है। लेकिन आरक्षण का सही से लाभ उस तबके तक आज भी नहीं पहुंचा जिसके लिए बनाया गया था। आज़ादी के 74 वर्ष बाद अभी भी आरक्षण जिनके लिए था उनकी आर्थिक सामाजिक स्थित वही है लेकिन उन्हें जरूर इसका लाभ मिला जिनकी संख्या तो 14 प्रतिशत है लेकिन सरकारी नौकरियों एवं लाभ का 90 प्रतिशत हिस्सा काबिज कर रखा है।

आइये भारत में आरक्षण और जाति का समीकरण समझते है।

नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन (NSSO) के एक सर्वेक्षण में देश में ओबीसी की आबादी 40.94%, SC की जनसंख्या 19.59%, ST की आबादी 8.63% और बाकी की 30.80% थी।

केंद्र के द्वारा दिया गया आरक्षण

वर्ग कितना आरक्षण
अनुसूचित जाति (SC) 15 %
अनुसूचित जनजाति (ST) 7.5 %
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) 27 %
कुल आरक्षण 49.5 %

अब देखे आरक्षित वर्ग को कितना मिला लाभ ?

बता दें कि देश में कुल 40 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं, जिसमें कुल पढ़ाने वाले 11486 हैं और गैर शिक्षण कर्मचारी 5835 हैं। साथ ही इन 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 1125 प्रोफेसर हैं-

  • इनमें दलित प्रोफेसर 39 यानी 3.47 फीसदी (15 फीसदी होने चाहिए थे),
  • आदिवासी प्रोफेसर 6 यानी 0.7 फीसदी (7.5 फीसदी होने चाहिए थे)
  • पिछड़े प्रोफेसर 0 है (27 फीसदी होने चाहिए थे)
  • सवर्ण प्रोफेसर 1071 यानी 95.2 फीसदी (अधिकतम 50 फीसदी हो सकती) हैं।

क्या है असिस्टेंट प्रोफेसर का हाल?

वहीं देश के 40 केंद्रीय विश्वविद्यालय में 7741 असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।

  • इसमें 931 यानी 12.2 फीसदी दलित प्रोफेसर (न्यूनतम चाहिए 1161 पद)
  • 423 यानी 5.46 फीसदी आदिवासी प्रोफेसर (न्यूनतम चाहिए 581 पद)
  • 1113 यानी 14.38 फीसदी पिछड़े वर्ग प्रोफेसर (न्यूनतम चाहिए2090 पद)
  • 5130 यानी 66.27 फीसदी सवर्ण प्रोफेसर (अधिकतम चाहिए 3870 पद) हैं।

केंद्रीय नौकरियों का क्या है हाल? 

  • रेलवे में कुल 16381 पद हैं, जिसमें 1319 (8.05%) पिछड़े और 11273 (68.72%) सवर्ण कर्मचारी हैं।
  • 71 विभागों में कुल 343777 पद हैं, जिसमें 51384 (14.94%) पिछड़े और 216408 (62.95%) सवर्ण कर्मचारी हैं।
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय में कुल 665 पद हैं, जिसमें 56 (8.42%) पिछड़े और 440 (66.17%) सवर्ण कर्मचारी हैं।
  • कैबिनेट सचिवालय में कुल 162 पद हैं, जिसमें 15 (9.26%) पिछड़े और 130 (80.25%) सवर्ण कर्मचारी हैं।
  • राष्ट्रपति सचिवालय में कुल 130 पद हैं, जिसमें 10 (7.69%) पिछड़े और 97 (74.62%) सवर्ण कर्मचारी हैं।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि आरक्षण का लाभ अभी तक 70 सालों में उस वर्ग को नहीं मिला जिसके लिए बनाया गया था जबकि आरक्षण को ख़त्म करने की कवायत प्रतिदिन की जा रही है। जब आरक्षण रहते हुए भी एक जातियों को उनका हक़ नहीं मिला तब बिना आरक्षण के इनका सामाजिक परिदृश्य क्या होगा यह सोंचा भी नहीं जा सकता है ?

सरकारी संसाधनों का 90% प्रयोग करने वाली मात्र कुछ जातियां ठाकुर,ब्राह्मण, वैश्य, कायश्थ है। अब सवाल है कि जिन जातियों की कुल भागीदारी ही मात्र 14 % के आस -पास है वे 90 % पर कब्ज़ा कर रखी है जबकि EWS के नाम पर 10 % आरक्षण अलग से ले रखा है।

डाटा सोर्सेज (मोहित पारीक आर्टिकल ) पब्लिश्ड 17 जनवरी 2019,

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