फोन टैपिंग मामला:राजस्थान सरकार ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट, लिखा- किसी राजनीतिक व्यक्ति का फोन टैप नहीं किया गया

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राजस्थान में सियासी घमासान की धुरी रहे फोन टैपिंग मामले में राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने रिपोर्ट में कहा है कि फोन टैपिंग में नियमों का पालन किया गया है। राज्य के गृह सचिव की अनुमति के बाद ही टेलीफोन टैपिंग की गई। साथ ही, किसी भी राजनीतिक व्यक्ति का फोन टैप नहीं किया गया है। शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव से टेलीफोन टैपिंग को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।

इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि फोन टैपिंग करने का क्या आधार रहा है। किस तरह की बातचीत का इनपुट जांच एजेंसियों को मिला था, जिसके बाद फोन टैंपिग की गई।

कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर अशोक सिंह और भरत मलानी को किया गिरफ्तार

स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने सबसे पहले भाजपा नेता अशोक सिंह और भरत मलानी को कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर गिरफ्तार किया था। एसओजी ने बताया था कि तस्करी के मामले में कॉल रिकॉर्डिंग के दौरान ही विधायकों की खरीद-फरोख्त के इनपुट मिले थे। इसके बाद इन दोनों को गिरफ्तार किया गया था।

इसके अलावा, मामले में एसओजी में तीनों विधायकों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज की गई थी। इनमें दौसा की महवा सीट से विधायक ओमप्रकाश हुड़ला, अजमेर की किशनगढ़ सीट से विधायक सुरेश टांक और पाली जिले में मारवाड़ जंक्शन से विधायक खुशवीर सिंह के नाम हैं।

आरोप है कि इन तीनों विधायकों ने राज्यसभा चुनाव से पहले बांसवाड़ा में विधायकों से संपर्क किया था। उन्हें खरीद फरोख्त के लिए करोड़ों रुपए की रकम देने का ऑफर दिया था। तीनों विधायकों के संपर्क अशोक सिंह और भरत मालानी से बताए जा रहे थे।

फिर 16 जुलाई को वायरल हुए थे खरीद-फरोख्त से जुड़े ऑडियो

इसके बाद, 16 जुलाई को विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़े हुए तीन ऑडियो वायरल हुए थे। इसमें संजय जैन और गजेंद्र सिंह और भंवरलाल शर्मा का नाम सामने आया था। इसके बाद कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने भंवरलाल शर्मा, गजेंद्र सिंह और संजय जैन के खिलाफ एसओजी में एफआईआर दर्ज करवाई थी।

इस बीच 18 जुलाई को जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया। सीआईडी क्राइम ब्रांच और एटीएस-एसओजी एक साथ मिलकर काम कर रही हैं। वहीं, एसीबी द्वारा भी एफआईआर दर्ज कर ऑडियो सैंपल जांच के लिए एफएसएल के पास भेजे गए हैं।

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