प्रशांत किशोर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के प्रधान सलाहकार नियुक्त

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 चंडीगढ़ : पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को अपना प्रधान सलाहकार नियुक्त किया है. पंजाब में अगले साल 2022 में विधानसभा चुनाव होना है. ऐसे में यह कैप्टन अमरिंदर सिंह का बड़ा चुनावी दांव साबित हो सकता है.

 पंजाब में विधानसभा की तैयारियों में कांग्रेस जुट गयी है. अमरिंदर सिंह ने प्रशांत किशोर को कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया है. मालूम हो कि साल 2017 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भी प्रशांत किशोर ने अमरिंदर सिंह के लिए चुनावी रणनीति तैयार की थी.

 मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दी गयी जानकारी के मुताबिक, प्रशांत किशोर को टोकन मानदेय के रूप में मात्र एक रुपये वेतन मिलेगा. हालांकि, उन्हें एक निजी सचिव, एक निजी सहायक, एक क्लर्क, एक डाटा एंट्री ऑपरेटर और दो चपरासी मिलेंगे.

प्रशांत किशोर का कार्यकाल मुख्यमंत्री के कार्यकाल तक रहेगा. उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जायेगा. साथ ही कैबिनेट मंत्री के समान ही नि:शुल्क सुसज्जित सरकारी निवास और शिविर कार्यालय भी मिलेगा.

इसके अलावा बिना किसी सीमा के कार्यालय और शिविर कार्यालय/निवास में एक लैंडलाइन और मोबाइल फोन खर्च भी दिया जायेगा. कार्यालय के अलावा शिविर कार्यालय/निवास में स्वतंत्र फैक्स लाइन दिया जायेगा.

प्रशांत किशोर को परिवहन की सुविधा ट्रांसपोर्ट कमिश्नर उपलब्ध करायेंगे. साथ ही ट्रेन और हवाई यात्रा में कैबिनेट मंत्री के समान सुविधा दी जायेगी. आगंतुकों के लिए प्रतिमाह पांच हजार रुपये दिये जायेंगे. जबकि, चिकित्सा सुविधा कैबिनेट मंत्री के स्वीकार्य खर्चों के समान होगी.

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर कहा है कि ”प्रसन्नता हो रही है कि प्रशांत किशोर ने मेरे प्रधान सलाहकार के रूप में मेरा साथ दिया है. पंजाब के लोगों की भलाई के लिए एक साथ काम करने के लिए तत्पर हैं.”

वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर बताया है कि पंजाब कैबिनेट ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रधान सलाहकार के रूप में प्रशांत किशोर की नियुक्ति को कैबिनेट मंत्री के समान दर्जा दिया है.

मालूम हो कि साल 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने पांच राज्यों में चुनाव की रणनीति की जिम्मेदारी प्रशांत किशोर को दी थी. इसमें पंजाब में पार्टी को बहुमत मिली थी. हालांकि, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा था.

 

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