सिंधिया पहली बार राज्यसभा सदस्य की लेंगे शपथ, 13 महीने बाद मिलेगी संसद में एंट्री

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लोकसभा चुनाव 2019 में ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी परंपरागत सीट गुना-शिवपुरी से बीजेपी उम्मीदवार केपी यादव से मात खा गए थे. 13 महीने के बाद मध्य प्रदेश की सियासत ने ऐसी करवट ली कि वह उसी बीजेपी के कंधे पर सवार होकर राज्यसभा के रास्ते संसद पहुंचने में सफल हो गए. सिंधिया अपने राजनीतिक जीवन के सफर में पहली बार बुधवार को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेंगे.

बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को राजनीति विरासत में मिली है. उन्होंने अपने पिता माधवराव सिंधिया के 2001 में निधन के बाद राजनीति में कदम रखा और गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट को अपनी कर्मभूमि बनाया. पिता के निधन के बाद खाली हुई सीट से 2002 में उन्होंने गुना से चुनाव लड़ा और उसके बाद वह लगातार चुनाव जीतते रहे. इस तरह से पहले 2002, 2004, 2009 और 2014 में गुना-शिवपुरी से ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद बने थे. साथ ही मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में सिंधिया बीजेपी के केपी यादव से हार गए.

सिंधिया ने मध्य प्रदेश में कमलनाथ पर इशारों-इशारों में हमला बोलना शुरू कर दिया. मार्च 2020 में स्थिति ज्यादा बिगड़ गई और सिंधिया, कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद उनके 22 समर्थक विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया, जिससे कमलनाथ सरकार गिर गई. सिंधिया की मदद से मध्य प्रदेश में फिर से शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बन गई. शिवराज सरकार में सिंधिया समर्थकों का दबदबा कायम है.

वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्यसभा पहुंच गए हैं और आज बकायदा शपथ भी ग्रहण कर लेंगे. ऐसे में सिंधिया समर्थक कई बार यह इच्छा जाहिर कर चुके हैं कि महाराज मोदी सरकार में मंत्री बनें. सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक सुरेश धाकड़ ने बातचीत करते हुए कहा था कि महाराजा जल्द ही केंद्र में मंत्री भी बनेंगे. हमें उम्मीद है कि अगस्त के पहले सप्ताह में मंत्री के तौर पर उनकी ताजपोशी हो जाएगी. सिंधिया के केंद्र में मंत्री बनने से उपचुनाव की सभी 24 सीटों पर बीजेपी को फायदा मिलेगा.

सिंधिया समर्थक शिवराज के मंत्री ओपीएस भदोरिया ने भी मांग उठाते हुए कहा था कि मोदी सरकार जल्द ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए ताकि मध्य प्रदेश के उपचुनाव में बीजेपी को राजनीतिक तौर पर फायदा पहुंचा सके.

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