सरकार ने क्यों कसा डिजिटल मीडिया पर रेगुलेशन का फंदा

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आखिर काफी प्रयास के बाद सरकार ने डिजिटल मीडिया प्रतिबन्ध लगाने की योजना बना लिया है 9 नवंबर को जारी सूचना प्रसारण बोर्ड ने एक आदेश जारी करके यह जानकारी बताई की अब डिजिटल मीडिया पर पाबन्दी लगाई जाएगी।

हालंकि सवाल यह उठ रहे है कि अब सरकार उन ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टलों पर नजर बनाएगी जो सरकार के पक्ष में नहीं है कई पत्रकारों का कहना है कि सरकार का यह नोटिफिकेशन केवल उन न्यूज़ प्लेटफार्म के लिए अधिक प्रयोग किया जा सकता है जो सरकार पक्ष में नहीं और खोजी पत्रकारीयता और स्वतंत्रत पत्रकारिता पर पाबंधी लगाना है।

मुकेश कुमार वरिष्ट पत्रकार का कहना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया लगातार सरकार की नीतियों, खामियों, तानाशाही रवैया को लेकर तीखी प्रकिया करता आ रहा है।

सरकार मुख्य स्ट्रीम मीडिया को पूरी तरह कण्ट्रोल कर चुकी है लेकिन अब ऑनलाइन कोन्टेनेट पर कण्ट्रोल करने के लिए ऐसा कर रही है।

लगातार ऑनलाइन मीडिया की तीखी प्रकिया से सरकार की झीझालेदार मची हुयी है जिसके कारण अब केंद्र सरकार ऐसा कर रही है।

उनका कहना है कि यह जरूरी है की मीडिया कंटेंट पर लगाम हो लेकिन इसके लिए सरकार या कोई सरकारी व्यकित के द्वारा नहीं। इसके लिए स्वतंत्र संस्था हो जहाँ सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

लेकिन अगर सरकार ऐसा करना चाहती है तो कोई अलग से कानून बनाने की जरूरत नहीं थी पहले से ही ऐसा संस्थाए है।

जाहिर सरकार किसी न किसी तरीके से ऑनलाइन मीडिया पर सरकारी नियंत्रण करना चाहती है।

परंजय गुहा ठाकुरता लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि दुर्भाग्य है की भारत का मुख्य मीडिया आज सरकार के लिए पी आर का काम रही है प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पूरी तरह से सरकार के लिए काम करने लगी ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफार्म है जो सरकारी की तीखी प्रक्रिया कर रहे है लेकिन अब सरकार इस पर पाबंधी लगाने के लिए है।

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